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हंसराज रघुवंशी और उनकी पत्नी कोमल सकलानी की दोनों बार की शादी की तस्वीरें।

‘मेरा भोला है भंडारी, करता नंदी की सवारी’, भजन से सुर्खियों में आए सिंगर हंसराज रघुवंशी ने दोबारा शादी रचाई है। यह शादी उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर में हुई। इसकी तस्वीरें उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। हालांकि, यह शादी उ

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त्रियुगीनारायण मंदिर में दोबारा शादी रचाने पर उनकी पत्नी कोमल सकलानी ने लिखा- ” यहां भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इस मंदिर के अंदर सदियों से अग्नि जल रही है।। शिव-पार्वती जी ने इसी पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर विवाह किया था।”

कोमल सकलानी ने आगे लिखा…

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यहां सच्चे दिल से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। मेरी भी हुई है। अब भोलेनाथ और मां पार्वती के प्यार के प्रतीक स्थल पर हमने शादी की है। मैं अपनी भावनाओं को शब्दों में नहीं बता सकती। ये हमारा एक ड्रीम था, जो महादेव और मां पार्वती के आशीर्वाद से पूरा हुआ है।

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इस दौरान दोनों ने शादी का जोड़ा पहना। पूरे विधि विधान और पूजा पाठ के साथ विवाह की रस्में पूरी की। इसके बाद एक-दूसरे को वर मालाएं पहनाईं और अग्नि को साक्षी मानकर फिर से 7 फेरे लिए।

हंसराज रघुवंशी-कोमल सकलानी की दूसरी बार शादी के PHOTOS…

मंदिर में पत्नी कोमल को मंगल सूत्र पहनाते हंसराज रघुवंशी।

मंदिर में पत्नी कोमल को मंगल सूत्र पहनाते हंसराज रघुवंशी।

त्रियुगीनारायण मंदिर में शादी रचाने के बाद अपनी पत्नी, पुजारी और दोस्तों के साथ हंसराज रघुवंशी।

त्रियुगीनारायण मंदिर में शादी रचाने के बाद अपनी पत्नी, पुजारी और दोस्तों के साथ हंसराज रघुवंशी।

शादी के बाद पत्नी कोमल के साथ हंसराज रघुवंशी। इस दौरान दोनों ने माला भी पहनी हुई हैं।

शादी के बाद पत्नी कोमल के साथ हंसराज रघुवंशी। इस दौरान दोनों ने माला भी पहनी हुई हैं।

शादी के बाद पत्नी कोमल संग मंदिर को देखते हंसराज रघुवंशी।

शादी के बाद पत्नी कोमल संग मंदिर को देखते हंसराज रघुवंशी।

हंसराज रघुवंशी, जो दूसरी शादी से सुर्खियों में हैं….

1. सोलन में जन्मे हंसराज रघुवंशी हंसराज रघुवंशी का जन्म 18 जुलाई 1992 को हिमाचल प्रदेश के सोलन में हुआ। रघुवंशी का गांव कंदर है, जो सोलन और बिलासपुर की बाउंड्री पर स्थित है। रघुवंशी के पिता का नाम प्रेम रघुवंशी और मां लीला रघुवंशी हैं। उनकी स्कूली शिक्षा हिमाचल से ही हुई है। वह ग्रेजुएशन तक पढ़े हैं।

2. नौकरी नहीं मिली तो घर लौट आए हंसराज के घर के हालात अच्छे न होने पर वह आगे की पढ़ाई नहीं कर पाए। उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और दिल्ली चले गए। यहां उन्होंने नौकरी के लिए काफी कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। इसके बाद वह घर लौट आए।

3. कैंटीन में भजन गाते थे, एक स्टूडेंट की सलाह से किस्मत बदली घर लौटने के बाद हंसराज ने एक कॉलेज की कैंटीन में नौकरी शुरू कर दी। उन्हें गायकी का शौक था। वह कैंटीन में भजन गाते थे। जहां लोग और कॉलेज के स्टूडेंट्स उनके भजन सुनते थे। इसी दौरान कॉलेज के एक स्टूडेंट ने उन्हें सलाह दी कि वो अपने भजन रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डालें। हंसराज ने ऐसा किया और आज वह देश के लोकप्रिय गायक बन गए।

पत्नी कोमल सकलानी के साथ हंसराज रघुवंशी।- फाइल फोटो

पत्नी कोमल सकलानी के साथ हंसराज रघुवंशी।- फाइल फोटो

​​​PM मोदी कर चुके भजन की प्रशंसा श्री रामलला की अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भी हंसराज रघुवंशी ने ‘युग राम राज का आ गया…’ भजन गाया था। जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। जिसमें उन्होंने लिखा था कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के स्वागत को लेकर पूरा देश राममय है। उन्होंने भगवान श्री राम को समर्पित हंसराज रघुवंशी जी भजन सुनने की अपील की थी।

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