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7 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र

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मिसेज वर्ल्ड रही अदिति गोवित्रिकर ने कभी भी एक्टिंग प्रोफेशन को गंभीरता से नहीं लिया। ग्लैडरैग्स मेगामॉडल प्रतियोगिता के बाद जब यश चोपड़ा ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया तब मिलने नहीं गईं। इस बात का पछतावा अदिति को आज भी है। इसे वह अपनी जिंदगी की सबसे भूल मानती हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने कुछ फिल्में कीं, लेकिन एक्टिंग उनके लिए पैरेलल फील्ड था। उनका पूरा फोकस मेडिकल और मॉडलिंग में ही था।

हाल ही में अदिति गोवित्रिकर मुंबई के दैनिक भास्कर के ऑफिस आईं। उन्होंने अपने आने वाले प्रोजेक्ट, करियर और लाइफ से जुड़ी बातें शेयर कीं।

इस समय क्या कर रही हैं आप?

वेब सीरीज ‘मिसमैच्ड सीजन 3’ नेटफ्लिक्स पर 13 दिसंबर से स्ट्रीम होगी। यह बहुत लोकप्रिय सीरीज है। इसकी स्टोरी लाइन पहले यंगस्टर्स पर थी। उनके रिलेशन और जीवन में आने वाली मुसीबतों पर प्रकाश डाला गया था। अब इसमें कुछ और चीजें देखने को मिलेगी, इसमें मैंने रोहित सराफ की मां का किरदार निभाया है। जब मेरी दूसरी शादी होती है, तब मेरा बेटा मुझे शादी के मंडप तक लेकर जाता है। इस तरह के विषय भी मेकर ने इसमें चुने हैं।

अभी डिज्नी हॉट स्टार पर एक सीरीज ‘लाइफ खिल गई’ रिलीज हुई थी। इसके अलावा मैंने मार्वलस मिसेज इंडिया शुरू किया है। इसमें शादीशुदा, विधवा और तलाकशुदा महिलाएं भाग लेती हैं। इसका सेकेंड सीजन अक्टूबर में हुआ था। अभी इसके तीसरे सीजन की तैयारी चल रही है।

मार्वलस मिसेज इंडिया शुरू करने के पीछे आपकी क्या सोच रही है?

जब मैंने मिसेस वर्ल्ड में भाग लिया था। उस समय मेरी बेटी एक साल की थी। लोग मुझसे कहते थे कि तुम्हारी शादी हो गई है। अब इस बारे में क्यों सोचना? तुम्हारा करियर अच्छा चल रहा है। शादी के बारे में लोगों को पता चलेगा, तो ग्लैमर फील्ड में काम नहीं मिलेगा। उस समय लोगों की यही सोच थी कि शादी और बच्चे के बाद ग्लैमर फील्ड में करियर खत्म हो जाता है।

मैं यह सोच रही थी कि अगर लोग मेरे पर्सनल स्टेटस से काम देंगे, तो यह गलत बात है। मेरे पास मेडिकल की डिग्री थी। अगर ग्लैमर फील्ड में काम नहीं मिलेगा, तो मेडिकल फील्ड में चली जाऊंगी। उस सोच के साथ मैंने मिसेज वर्ल्ड में भाग लिया और मैं जीत गई। तब हमारे देश में लोगों को पता चला कि मिसेस वर्ल्ड भी कुछ होता है।

मैं चाहती हूं कि जो महिलाएं जीवन में कुछ बनने का सपना देख रही हैं, उनको एक मंच दूं। महिलाओं को सही सम्मान दिलाने के लिए मैंने मार्वलस मिसेज इंडिया ब्यूटी पेजेंट शुरू किया। ताकि उन महिलाओं की जर्नी को सेलिब्रेट कर सकूं, जो जीवन में कुछ करना चाहती हैं।

आपकी मिसेज वर्ल्ड की जर्नी कैसी रही है?

2001 में मिसेज वर्ल्ड प्रतियोगिता में 47 देश की महिलाओं ने भाग लिया था। फिनाले के समय कई महिलाओं की पूरी फैमिली आई थी। मेरी फैमिली से कोई नहीं था। मेरे एक कॉमन फ्रेंड के कहने पर रितेश देशमुख आए थे। उस समय उनको नहीं पहचानती थी। उस समय वो न्यूयॉर्क में पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन मुझे यह जानकार खुशी हुई कि कोई तो भारत से वहां है।

आपने सोचा था कि ग्लैमर फील्ड में अपनी किस्मत आजमानी है?

बचपन से मुझे डॉक्टर ही बनना था। मेरे पिता जी बहुत स्ट्रिक्ट थे। उन्होंने कहा था कि अगर मेरिट पर नहीं आई तो प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन के लिए डोनेशन नहीं देंगे। मेरा पूरा फोकस पढ़ाई पर ही था। मैंने नंबर्स अच्छे आए और मेरा एडमिशन जे जे मेडिकल कॉलेज में हो गया।

मेरी मम्मी को फिल्म्स देखने का बहुत शौक था। मैं पनवेल में पली बढ़ी हूं, वहां का रेलवे स्टेशन शूटिंग के लिए बहुत पॉपुलर था। वहां मम्मी के साथ शूटिंग देखने जाती थी। मुझे तो याद ही नहीं था। मम्मी बताती थी कि मुझे गोद में लेकर शूटिंग देखने जाती थीं, लेकिन मेरे मन में एक्टर और मॉडल बनने का कभी ख्याल नहीं आया।

फिर कैसे मॉडल और एक्टर बनने का ख्याल आया था?

मुझे नई-नई चुनौतियां बहुत पसंद हैं। मुझे अलग-अलग फील्ड के लोगों से दोस्ती रखने में अच्छा लगता है। इससे हमारा नॉलेज बढ़ता है। मैं अपने एक फोटोग्राफर फ्रेंड के साथ लोनावाला घूमने गई थी। मैं बैठी थी, अचानक वो मुझे देखकर बोले कि तुम्हारी बॉडी लैंग्वेज मॉडल जैसी है। उन्होंने मेरे कुछ फोटो शूट किए। उनके पिताजी एक ऐड एजेंसी में काम करते थे। उन्होंने मुझे मॉडलिंग की सलाह दी।

मैंने 1996 में ग्लैडरैग्स मेगामॉडल प्रतियोगिता में भाग लिया और जीत गई। उस प्रतियोगिता में यश चोपड़ा, हेमा मालिनी, शोभा डे जज थे। यश चोपड़ा जी ने मिलने के लिए कहा था। मुझे उस समय फिल्म्स में इंटरेस्ट नहीं था। इसलिए नहीं मिलने गई। वह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी। मुझे इतनी बड़ी शख्सियत से जरूर मिलना चाहिए था। फिल्म में काम मिलना या ना मिलना अगल बात थी। खैर, इसके बाद भी फिल्मों के ऑफर मिलते रहे और मैं मना करती रही।

लेकिन तब आपको कब लगा कि एक्टिंग में किस्मत आजमानी चाहिए?

जब एक्टिंग के लिए सामने से ऑफर आ रहे थे, तब सोची कि क्यों ना एक बार कोशिश करके देखा जाए? 1999 में मैंने तेलुगु फिल्म ‘थम्मुडु’ में पवन कल्याण के साथ काम किया। यह फिल्म सुपर हिट रही। मुझे वहां पर टिके रहना चाहिए था, लेकिन वापस आ गई। हिंदी में ‘16 दिसंबर’, ‘सोच’, ‘दे दना दन’ जैसी कई फिल्में की, लेकिन मेरा फोकस मॉडलिंग में ही रहा।

बॉलीवुड में काम करने का कैसा अनुभव रहा है, कई फिल्मों में काम करने के बाद आपने दूरी क्यों बना ली?

उसका एक कारण यह है कि एक्टिंग की तरफ मेरा कभी भी फोकस नहीं रहा है। मेरे पास जो फिल्में आईं, उसमें रोल्स अच्छे लगे, तो कर लिया। मैंने फिल्मों के लिए कभी सामने से किसी को अप्रोच नहीं किया। एक्टिंग मेरा पैरेलल फील्ड था। मेडिकल और मॉडलिंग में ही मेरा पूरा फोकस था। साथ में एक्टिंग चलती रही, लेकिन इसमें एक-दो अच्छे अनुभव नहीं रहे हैं।

जीवन में सबसे बड़ा स्ट्रगल क्या रहा है?

पूरा जीवन ही स्ट्रगल है। मेरी पर्सनल लाइफ सफल नहीं रही। इससे निकलने में मुझे काफी समय लगा। इसके बारे में अभी बात नहीं करना चाहूंगी, लेकिन मैंने कभी फेलियर नहीं महसूस किया। जीवन में हमेशा सक्सेस ही बनना चाहा है। फिल्म इंडस्ट्री में कभी स्ट्रगल नहीं रहा, क्योंकि मेरे पास ऑप्शन था कि अगर यहां सक्सेस नहीं मिलती, तो मेडिकल फील्ड तो है ही।

आप पर्सनल लाइफ की बात कर रही थीं। ऐसी क्या वजह होती है कि शादी के बाद पति-पत्नी के बीच दूरियां पैदा हो जाती हैं?

रिलेशनशिप में कोई गारंटी वारंटी नहीं होती है, लेकिन अवेयरनेस होनी चाहिए। रिलेशनशिप में दो व्यक्तियों के बीच अंडरस्टैंडिंग होनी चाहिए। हम अपनी जिंदगी में धीरे-धीरे आगे बढ़ते जाते हैं। शारीरिक और मानसिक रूप से बदलाव होता रहता है। यह बदलाव अगर साथ नहीं हुआ, तो क्लेश होता है। आज की तारीख में सबसे बड़ी समस्या मोबाइल फोन है। इसकी वजह से बहुत सारे रिश्ते टूट रहे हैं।

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